आलौकिक शक्ति

कोई तो शक्ति है इस ब्रह्माण्ड में l
जो किसी को नज़र नहीं आती l
किन्तु किसी न किसी रूप में l
अपने होने का आभास कराती ll

कैसे एक माँ की कोख में l
शरीर के अंग बन जाते है ?
आँख ,नाक सब एक से l
चेहरे अलग नज़र आते है ?

कैसे सूरज की दस्तक से l
ये अंधकार मिट जाता है?
चंदा मामा के आते ही l
सूरज कहाँ छिप जाता है ?

सांसो की डोरी जब टूटती l
कैसे शरीर ढेर हो जाता है ?
कहाँ चली जाती वो सांसे l
कोई समझ नहीं पाता है ?

जन्म-मरण के फेर को l
क्या कोई समझ पाया ?
हाथो में खींची इन लकीरो में l
क्या मुक्कदर लिख कर आया ?

चश्में है सबके अलग-अलग l
नज़रिया अलग हो सकता है l
ईश्वर,अल्ला,वाहेगुरु,ईशा l
रूप में उसी का रूप तो होता हैll

वो ही है आलौकिक शक्ति l
फिर मै-मै क्यों समाया ?
जब प्राण पखेरू उड़ने लगे l
मुख़ पे नाम उसी का आया ll

8 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 24/05/2016
    • Rajeev Gupta RAJEEV GUPTA 25/05/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 24/05/2016
    • Rajeev Gupta RAJEEV GUPTA 25/05/2016
  3. babucm babucm 25/05/2016
    • Rajeev Gupta RAJEEV GUPTA 25/05/2016
  4. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 25/05/2016
    • Rajeev Gupta RAJEEV GUPTA 25/05/2016

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