आइए श्रीमान

आइए श्रीमान, बैठिए जजमान,
जरा हाथ तो दिखाइए,
समस्या क्या है जरा हमें भी बताइए,
कर देंगे पलो में निवारण,
मुथकरणी, वशीकरण,
विदेश का योग, व्यापार में लाभ,
बदल देंगे किस्मत आपकी,
जैसी कहेंगे आप,
आइए श्रीमान, बैठिए जजमान,
कालसर्प हो, मांगलिक का दोष हो,
या जवानी में कम जोश हो, चिंता चिता सामान,
सोचते क्या है ? घबराते क्या है ?
पलो में सारे उतार देंगे आपका बोझ,
आइए श्रीमान, बैठिए जजमान,
जाने क्या मेरे दिल में आई,
मैंने भी अपने दिल की बात पंडित जी को कह सुनाई,
कब बदलेंगे मेरे देश के हालात ?,
कब तक लोगो के घर दंगो में जलेंगे ?,
कब तक नारी को बेआबरू किया जायेगा ?,
कब तक मेरे बच्चों का बचपन छीना जायेगा ?,
कब तक झूठे वादों से लोगो को ठगा जायेगा ?,
आइए श्रीमान, बैठिए जजमान,
पहले तो पंडित मेरी पीड़ा सुन मुस्काये,
फिर चिंता के साथ उनकी आँखों में अश्रु आये,
बोले पंडित जी इसका हल,
तुम ही खुद कर सकते हो,
अपने दिल से ईष्या, क्रोध, अहंकार को मिटा दो,
मेहनत ही जीवन, माँ-पिता का सम्मान,
मिलकर चलने की आशा, अन्धविश्वाश का दीया अपने,
मगज से मिटा दो,
आइए श्रीमान, बैठिए जजमान,
हर इंसा को इंसानियत की नज़र से देखो,
नशो की गर्मी में खुद को मत सेको,
शिक्षा का रंग हर किसी में भर दो,
अपने स्वार्थ को दरकिनार कर दो,
किस रफ़्तार से देश बदलता,
फिर तुम अपनी नज़र से देखो,
आइए श्रीमान, बैठिए जजमान,
मेरे जैसे हर धर्म में लाखो है जो,
जीवन में सफलता का शॉटकट बताएँगे,
अजी साहब दिखावे से भरी है दुनिया,
किसी भूखे को दो रोटी नहीं,
कही शिला को दूध से,
कही मजार पे चादर जरूर लोग चढ़ाएंगे,
आइए श्रीमान, बैठिए जजमान,

4 Comments

  1. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 24/05/2016
    • mani mani 25/05/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 24/05/2016
    • mani mani 25/05/2016

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