विडंबना

जिनके लिए झोंक दिया
अपने तन-मन को,
अपने कन-कन को।
सहते गए हर व्यथा
ताकी,
जीवन के पथ पर
वो बढ़े सदा,
वो फले सदा,
पर क्या मिला??
वो तो अपनी -अपनी
राह चल दिए,
चलना है किससे सिखा,
खुद खाया,
किसको रखकर भूखा,
यह बात भूल,
अपने सिर को
तान चल दिए ।।

हाँ यही तो करते हैं
कुछ बच्चे,
माता-पिता बुढ़ापे को
ढोते हैं रोते-रोते ।

पुरानी हो चुकी
इमारतों की भाँती,
उन्हें अकेला,बेबस, सूना
देते हैं छोड़
सहने के लिए,
आँधी, तूफान,
तपती धूप,
ठिठुरती ठंड,
ऊफनता रूदन
पुरानी मिट्टीयों का
मिटता सौंधापन
जो अब सड़-सड़
छिलता है उनका बदन,
और जब उनके
तन की सारी परते
जाती हैं उतर,
तब उनकी हड्डियों को
छेदते हुए,
वे आते हैं ऊभर,
खोखली संपत्ति पर
जताने अपना हक।

अजीब विडंबना है –
क्षोभ से भरी तिमिर कोठरी,
फिर भी उर से निकलती
आशीर्वाद निठूरी,
माँ-बाप की वेदना निगोड़ी
उनसे हीं लिपटी-चिपटी,
जाने क्यों,
उनके हीं अंश को
नहीं है खलती।।

अलका

14 Comments

  1. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 23/05/2016
    • ALKA प्रियंका 'अलका' 23/05/2016
  2. Jay Kumar 23/05/2016
    • ALKA प्रियंका 'अलका' 23/05/2016
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 23/05/2016
    • ALKA प्रियंका 'अलका' 23/05/2016
  4. C.M. Sharma C.m. sharma(babbu) 23/05/2016
    • ALKA प्रियंका 'अलका' 23/05/2016
  5. Meena Bhardwaj Meena bhardwaj 24/05/2016
  6. ALKA प्रियंका 'अलका' 24/05/2016
  7. mani mani 24/05/2016
  8. ALKA प्रियंका 'अलका' 24/05/2016
  9. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 24/05/2016
    • ALKA प्रियंका 'अलका' 24/05/2016

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