हम हो गए कंगाल

आजादी का शतक न बीता,
हम हो गए कंगाल ।
अहिंसा से आजादी छीनी,
नहीं बिछाया जाल ।
ईमान ख़रीदा, अस्मत लूटी,
खुद धरती के लाल ।
षड़यंत्र, फरेब से ओहदा पाया,
देखो इनका कमाल ।
उनका क्या जो शहीद हो गए,
तस्वीरों में गुलाल ।
शहीदों पर नतमस्तक होकर,
बदली अपनी चाल ।
सत्ता के गलियारे में पहुंचे,
खादी बन गई ढाल ।
समाज पर सितम ढाते हैं,
बांका हो न बाल ।

विजय कुमार सिंह

6 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 23/05/2016
  2. babucm babucm 23/05/2016
  3. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 23/05/2016
  4. mani mani 23/05/2016
  5. MANOJ KUMAR MANOJ KUMAR 23/05/2016
  6. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 23/05/2016

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