फरेब

क्यूँ होता है एहसास रेत में समंदर का
वीराने में बसी किसी बस्ती के मंजर का
फरेब की दस्तक है कुदरत के नजारों में
इंसानियत लुट रही इशारों इशारों में
चमन भी उजड़ रहे अब तो बहारों में
जिंदगी दम तोड़ रही सूखे किनारों में

विजय कुमार सिंह

2 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 23/05/2016
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 23/05/2016

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