सिर्फ मन्नते

मन्नते सिर्फ मन्नते मांगता रहा,
कभी अपने आज के लिए,
कभी अपने कल के लिए,
कुछ खोने के डर से,
कुछ पाने की मंशा से,
मन्नते सिर्फ मन्नते मांगता रहा,
तारीफ की खुद की मैंने,
अपनी सोच की काबिलियत पर,
टूट कर बिखरा जब,
कोसता रहा तुझे,
खुद की नादानियों पर,
मन्नते सिर्फ मन्नते मांगता रहा,
उम्र गुजरी कुछ पाने में,
कुछ बनाने में,
सब रह गया धरा यही का यही,
अपनों ने देर न की जलाने में,
मन्नते सिर्फ मन्नते मांगता रहा,
कभी सोचा नहीं,
मैँ कौन हु, कहाँ से आया,
बस तुझसे मांग-मांग,
भोगविलास की जिंदगी,
अपना जन्म गवाया,

मन्नते सिर्फ मन्नते मांगता रहा,

4 Comments

  1. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 22/05/2016
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 22/05/2016
  3. babucm C.m. sharma(babbu) 22/05/2016
  4. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 22/05/2016

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