“तेरी मुस्कुराहट “

तेरी वो मुस्कुराहट एक सजा बन गयी,
वफा हमने की ,
जो खता बन गयी ।
डुब गया मोहब्बत मे दिल इस कदर,
लुट के आशियाना ये तो बस हवा बन गयी ।
सुलखिया बन कर ये सिमटने लगी ,
रंज खुशबु की गहरी बरसने लगी ।
चोट दिल पर लगा कर ,
फिर दवा बन गई ।
तेरी वो मुस्कुराहट एक सजा बन गयी ।

था बना आशियाना इक प्यार का ,
जिसमे सागर सी चाहत थी दिदार का ।
आग ऐसी लगी रौशनी से कभी,
फिर बुझाते बुझाते ये धुंआ बन गयी ।
तेरी वो मुस्कुराहट एक सजा बन गयी,
वफा हमने की जो खता बन गयी । ।

काजल सोनी

3 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 25/05/2016
  2. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 25/05/2016
  3. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 25/05/2016

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