विषधर

विषधर
दांतों में समेटे रहते हो जहर
खुद की रक्षा में हर प्रहर
देखकर हर प्राणी जाते सिहर
डंसने पर जिंदगी जाती ठहर
एक बार में ही ढा देते कहर

विषधर
इंसान की सोंच का देखो जहर
खुद की लोभ में हर प्रहर
देखकर हर प्राणी जाते सिहर
बिना डसे जिंदगी जाती ठहर
बार-बार ढाता रहता कहर

विजय कुमार सिंह

3 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 21/05/2016
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 21/05/2016
  3. babucm C.m sharma (babbu) 22/05/2016

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