कविता- कीमत बचपन की

क्या कीमत मेरे बचपन की |
अब कौन मुझे बतलायेगा ||
हवस भरी नज़रों से देखो |
आज मुझे कौन बचायेगा |

हाथ पैर तोड़ कहाँ कैसे |
किस को कौन बेच आयेगा ||
देख कर मेरी मासूमियत |
कौन कहाँ ठग ले जायेगा ||

कैद हुआ है बचपन मेरा |
दीवारों में मर जायेगा ||
खुली हवा में शायद देखो |
बचपन साँसे ले पायेगा ||

महकी डालिया, चहकें राह |
दानों को भून रही बुढ़िया ||
मिटटी के खिलौने ग़ुम कहाँ |
खेले न खेल गुड्डे गुड़िया ||

साईकल का पहिया ले कर |
कभी गली गली में भागना ||
बिठा कर कंधों पर ही साथ |
बापू का मेले ले जाना ||

सरे आम मेरे अंगो को |
भरे बाजार बेचा जाता ||
भूखे कभी मरे सड़को पर |
जग को तरस नहीं आता ||

सब ने घोटालों के किस्से |
इक दूजे को देखो सुना दिये ||
दर्द भरी मेरी दास्ताँ के |
शब्द जुबां से हटा दिये ||

सरकार, समाज, मीडिया ने |
खुद को चुप्पी में है ढाला ||
दिखता नहीं मुझे बचपन में |
होगा कोई कभी उजाला ||

स्वार्थ में जी रहा जमाना |
बेकार “मनी” दर्द सुनाना ||
क्या कीमत मेरे बचपन की |
अब कौन मुझे बतलायेगा ||

मनिंदर सिंह “मनी”

8 Comments

  1. C.M. Sharma C.m.sharma (babbu) 21/05/2016
    • mani mani 21/05/2016
  2. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 21/05/2016
    • mani mani 21/05/2016
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 21/05/2016
    • mani mani 21/05/2016
  4. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 21/05/2016
    • mani mani 21/05/2016

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