सौंधी महक

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सौंधी महक को मैने प्यार भरी कविताओं से रिषतों की गरिमा से वेदना, भजनो और सूफी गजलों से महकाया है।

भावो के सुंदर मोतियों से इसे पिरोया है। हर एक मोती का रंग रूप अलग है पर सभी आपके मन को छू लेगे। ़ऊर्दू और हिन्दी का मिलन भी अनूठा हैं।

(उर्मिल कपूर)

3 Comments

  1. Soniya 21/05/2016
  2. C.M. Sharma C.m.sharma (babbu) 21/05/2016
  3. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 21/05/2016

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