अभिव्यक्त

नीम का अर्थ पीपल था पीपल का बरगद बरगद का तुलसी इसी तरह कमल का गुलाब गुलाब का बेला
बेला का बोगेनवीलिया पर शुक्र है पेड़ का अर्थ कोई पेड़ फूल का कोई फूल ही था इतना रहता था मैं मनुष्यों
के बीच फिर भी कबीर का अर्थ घनानंद मीरां का अर्थ महादेवी नहीं था मेरी सारी गफ़लत उन के बारे में थी
जो मनुष्य नहीं थे मैं उन दिनों की बात कर रहा हूँ जब मेरा अर्थ तुम हो जातीं अगर मैं अपना अर्थ रह गया
होता मैं उन दिनों की बात कर रहा हूँ जब पेड़ों से झूल रही थीं लाशें हर तरफ और कई दिनों से विनोद कुमार शुक्ल
की कोई कविता नहीं थी जीवन में

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