“पत्थरदिल”

परम्परा मे धर्म बसता है
जैसे पत्थर में शिल्प
शिल्प में खूबसूरती बसती है
और बसते हैं भगवान
भगवान में बसती है आस्था
और आस्था में विश्वास
विश्वास सफलता की कुंजी हैं
पत्थर शिल्प की कुंजी
फिर क्यों हम-तुम “पत्थरदिल”
सुनकर उखड़ जाते हैं ?

“मीना भारद्वाज”

13 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 21/05/2016
  2. Meena Bhardwaj Meena bhardwaj 21/05/2016
  3. Kajalsoni 21/05/2016
    • Meena Bhardwaj Meena bhardwaj 21/05/2016
  4. C.M. Sharma C.m. sharma (babbu) 21/05/2016
    • Meena Bhardwaj Meena bhardwaj 21/05/2016
  5. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 21/05/2016
    • Meena Bhardwaj Meena bhardwaj 21/05/2016
      • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 21/05/2016
        • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 21/05/2016
          • Meena Bhardwaj Meena bhardwaj 21/05/2016
  6. ALKA ALKA 21/05/2016
  7. Meena Bhardwaj Meena bhardwaj 21/05/2016

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