“बोली”

कई रंगो से बना ये जीवन,
सब रंग है मोल ।
बोली ही लुभाय मन को ,
देख परख कर बोल ।

कच्चे धागे रिश्तो के ,
जाये न ये टुट ।
प्रेम भरे शब्द कहो ,
वरना सब जायेंगे छुट ।

जैसा बोलोगे वैसा सुनोगे ,
कटु वचन से डर ।
सर झुकाना न पड़े ,
उपयोग बोली ऐसा कर ।

बोली से बनते रिश्ते ,
गैर भी हो जाते फरिश्ते ।
बुरी बोली है जैसे तीर ,
बहा न देना अखियो से तुम किसी के नीर ।

हंसी ठिठोली भले न करना ,
शब्दो को तु ऐसे तोल ।
ग्यानी बड़े सब बोल गये ,
बोली है बड़ी अनमोल ।।

11 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 20/05/2016
  2. Kajalsoni 20/05/2016
  3. babucm babucm 20/05/2016
  4. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 20/05/2016
  5. Kajalsoni 20/05/2016
  6. Meena Bhardwaj Meena bhardwaj 20/05/2016
  7. Kajalsoni 20/05/2016
  8. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 20/05/2016
  9. MANOJ KUMAR MANOJ KUMAR 20/05/2016
  10. Kajalsoni 21/05/2016
  11. Kajalsoni 21/05/2016

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