वीरों का देश

वीरों का देश

लेखनी जरा मचल कर चल
लिखना है तुम्हें इतिहास,
इसलिए जरा संभल कर चल ।
आज लिख वीरों की कहानी
जिसे लिखता हूं तेरी जुबानी
कितने वीर कर गए
मातृभूमि पर निछावर जीवन ।
लेखनी जरा मचल कर चल
लिखना है तुम्हें इतिहास,
इसलिए जरा संभल कर चल ।
वीरों की पावन धरा है जो
जिसे खून से वीरों ने सींचा
लिखना वही जो मचा दे हलचल
आज के युवाओं में भर दे मातृत्व
लेखनी जरा मचल कर चल
लिखना है तुम्हें इतिहास,
इसलिए जरा संभल कर चल ।
आज के युवा भटक गए
पश्चिमी सभ्यता की चकाचौंध में
साधारण बन जाओ युवाओं
स्वदेशी वस्तुएं अपना कर ।
लेखनी जरा मचल कर चल
लिखना है तुम्हें इतिहास,
इसलिए जरा संभल कर चल ।

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