मेरी तमन्ना

मेरी तमन्ना

चाहता हूं लग जाए मुझे भी पंख
छू लूं आकाश, चुमूं बादल भी ।
देखता हूं अम्बर को जब
हो जाती हैं तेज सांसे
नज्ब जाती है भडक़
तभी तो रहता हूं सोचता
उड़ता फि रूं मैं भी
चाहता हूं लग जाए मुझे भी पंख
छू लूं आकाश, चुमूं बादल भी ।
आंखों में एक चमक
होठों पर मंद हंसी
आ जाती है तब
देखता हूं जब मेघ तीतर पंखी
आता है मजा भी
चाहता हूं लग जाए मुझे भी पंख
छू लूं आकाश, चुमूं बादल भी ।

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