आंचल छूकर आई हवा

आंचल छूकर आई हवा

तेरे आंचल को छूकर आई हवा,
खुशबु तेरे बदन की लाई हवा ।
इस हवा में तेरा फू ल सा चेहरा
मुझे अनायास दिखाई देने लगा
खुशबु से होता है रोओं में स्पंदन
रोम-रोम होता है मेरा प्रफु ल्लित
देख तुम्हारे सुन्दर मनोहर मुख को
कहां से ऐसा खुमार लाई हवा ।
तेरे आंचल को छूकर आई हवा,
खुशबु तेरे बदन की लाई हवा ।
हवा में ठंडक व महकती सुगंध
जैसे हो बना अभी ताजा गुलकंद
मस्ती में झूमती सी यह लगती
कैसे इठलाती चलती आ रही
इठलाती बलखाती आ रही है
जैसे आती हो मेरी दिलरूबा ।
तेरे आंचल को छूकर आई हवा,
खुशबु तेरे बदन की लाई हवा ।

One Response

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 20/05/2016

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