१८. तुमसे इश्क क्या हुआ……………|ग़ज़ल| “मनोज कुमार”

तुमसे इश्क क्या हुआ हँसना हमे तो आ गया
सुर्ख इन होठों के जैसे ले गुलाब आ गया

जेठ के मौसम में भी बादल गगन में छा गया
जुल्फें जो तेरी उड़ी सावन का महीना आ गया

जो गालों को झुमके छू रहे उनका भी मान बढ़ गया
आचल तुम्हें जो ढक रहा उस पे भी प्यार आ गया

भूल गया सब खो गया तेरी हँसी सी हर बात में
अब गा रहा है दिल खुशी में नाचना हमें आ गया

जिस्मों की खुशबुओं की रुत दीवानी हो गयी
ले गये मधुकर चुरा के उनको हँसना आ गया

है यही रब आरजू दिल ना कभी जुदा ये हों
हँस गये जबसे हो तुम हँसना हमे तो आ गया

हो गया है भान कुछ भी इश्क़ से अच्छा नही
आ गये महताब बन तो प्यार करना आ गया

मिटा दो शिकवे गिले बस रूह का मिलाप हो
‘मनोज’ कुछ आया नही बस प्यार करना आ गया

“मनोज कुमार”

7 Comments

  1. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 20/05/2016
  2. MANOJ KUMAR MANOJ KUMAR 20/05/2016
  3. babucm babucm 20/05/2016
  4. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 20/05/2016
  5. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 20/05/2016
  6. Rajeev Gupta Rajeev Gupta 20/05/2016
  7. MANOJ KUMAR MANOJ KUMAR 20/05/2016

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