वृक्ष लगाए, वृक्ष लगाए,

वृक्ष लगाए, वृक्ष लगाए,
ठंडी हवाएं, ठंडी छाए,
गुम सी फ़िज़ाए,
चलो फिर से लाए,
वृक्ष लगाए, वृक्ष लगाए,
बहती अंगार भरी लु,
कारखानों, मोटर-गाड़ी का,
हर तरफ धुंआ-धुंआ सा,
चलो वापिस लाए,
वो गुजरा दौर साइकिल का,
वृक्ष लगाए, वृक्ष लगाए,
बढ़ जाएगी उम्र,
ताज़ी हवा में सास ले,
बनता है फ़र्ज़ हम सभी का,
कुदरत से जो लिया,
उसको कुछ तो वापिस कर दे,
वृक्ष लगाए, वृक्ष लगाए,
पानी को भी बचाना होगा,
सुख रही है धरती,
फिर से हरा-भरा बनाना होगा,
वृक्ष लगाए, वृक्ष लगाए,
खुद को भी,
औरो को भी समझाना होगा,
अब भी वक्त है संभल जाये,
वर्ना कल को पछताना होगा |

2 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 19/05/2016
  2. babucm C.m. sharma(babbu) 19/05/2016

Leave a Reply