मैं कवि बना

मैं कवि बना

मैं कवि न था,
मगर कवि बन गया ।
मेरे गमों ने मेरा साथ दिया
रोते हुए कुछ पंक्तियां लिखी
और कवि बन गया ।
मैं कवि न था,
मगर कवि बन गया ।
मैनें जिन्हें चाहा था
उन्होंने कभी साथ न दिया
इसलिए मैं लिखने लगा ।
मैं कवि न था,
मगर कवि बन गया ।
गम लिपट गये दामन से मेरे
दोस्तों ने साथ छुड़ा लिया
गमों को शब्दों में ढालने लगा ।
मैं कवि न था,
मगर कवि बन गया ।

2 Comments

  1. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 19/05/2016
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 19/05/2016

Leave a Reply