गर्मी

गर्मी

उफ ये गर्मी
अच्छी थी वो सर्दी
जब हम ओढे रजाई
रहते थे बैठे चारपाई
आग जला भगाते सर्दी
खाते रेवड़ी मूंगफ ली ।
मगर आई गर्मी को
भगाएं दूर कैसे हम ।
भडक़ाती है और तपन को
फ्रि ज की ठंडी बर्फ
न घर में आराम है ।
न बाहर किसी बगीचे में
तभी कहते हैं बात सच्ची
गर्मी से सर्दी थी अच्छी ।

2 Comments

  1. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 19/05/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 19/05/2016

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