शहर

शहर

मुझे शहर रास न आया ,
जिसमें फै ली अद्भूत माया ।
शहरों को लिया आगोश में
पश्चिमी कपड़े और पहनावे ने
आधा नग्र नारी शरीर हुआ ।
मुझे शहर रास न आया ,
जिसमें फै ली अद्भूत माया ।
आधा नग्र नारी शरीर ही
बाधक है देश की तरक्की में,
भविष्य, हर बच्चा बेकार हुआ ।
मुझे शहर रास न आया ,
जिसमें फै ली अद्भूत माया ।
जिस्म को दिखाने की खातिर
पहनती वस्त्र कम शरीर पर
रेप सा भयानक रोग शुरू हुआ ।
मुझे शहर रास न आया ,
जिसमें फै ली अद्भूत माया ।
पहन कर भडक़ीले कपड़े
निकलती सडक़ों पर अकेले
देखें उन्हें तो देव भी हीलजां ।
मुझे शहर रास न आया ,
जिसमें फै ली अद्भूत माया ।

2 Comments

  1. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 19/05/2016
  2. babucm babucm 19/05/2016

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