ख़त्म मेरा किरदार करो

अब दुनिया के रंगमंच से
ख़त्म मेरा किरदार करो
अपनी मर्जी से रो पाऊँ
इतना तो उपकार करो
हर टुकड़े को जोड़ रहा हूँ
पर खुद को ही छोड़ रहा हूँ
इस टुकड़े के जुड़ने का भी
प्रबंध किसी प्रकार करो।
सपनों नें नींदे छीनी
और अपनों ने सपने छीने
बरसों की जागी आँखों अब
चिर निद्रा स्वीकार करो।
…देवेंद्र प्रताप वर्मा”विनीत”

7 Comments

  1. shivdutt 18/05/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 18/05/2016
  3. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 18/05/2016
  4. Amod Ojha 18/05/2016
  5. C.M. Sharma babucm 19/05/2016
  6. नवल पाल प्रभाकर Naval Pal Parbhakar 19/05/2016
  7. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 19/05/2016

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