फैलाओ हरियाली

फैलाओ हरियाली

गर्मी की तपिस ने
मचाया कैसा आतंक
तालाबों को सूखा दिया
पौधे किये तहस-नहस
खुद मानव ने ही
खोला मौत का दरवाजा
छुपें कहां हम सभी
अब तो मरने का है इरादा
मरने से बचाए कौन
था एक सहारा जो
खुद मानव ने उसको काटा
मानव के साथ – साथ
भुगतना पड़ रहा है
बेजुबान जीवों को भी
मरने का ये जुल्म
आज छोडक़र मानव को
मर रहे हैं जीव सैकड़ों
न स्वर्ग खाली है
न नरक ही
फि र से लगाओ पेड़
बढाओ धरती पर हरियाली
फैलाओ चारों और धरती पर
खुशहाली ही खुशहाली ।

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