कारवाँ गुजर गया

कारवाँ गुजर गया, गुबार देखते रहे
कत्ल करने वाले, अख़बार देखते रहे|

तेरी रूह को चाहा, वो बस मै था
जिस्म की नुमाइश, हज़ार देखते रहे||

मैने जिस काम मे ,उम्र गुज़ार दी
कैलेंडर मे वो, रविवार देखते रहे||

जिस की खातिर मैने रूह जला दी
वो आजतक मेरा किरदार देखते रहे||

सूखे ने उजाड़ दिए किसानो के घर
वो पागल अबतक सरकार देखते रहे ||

कारवाँ गुजर गया, गुबार देखते रहे

10 Comments

  1. Anish35a@ Anish 17/05/2016
    • shivdutt 17/05/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 17/05/2016
    • shivdutt 18/05/2016
  3. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 17/05/2016
    • shivdutt 18/05/2016
  4. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 17/05/2016
    • shivdutt 18/05/2016
  5. C.M. Sharma C.m.sharma(babbu) 17/05/2016
  6. shivdutt 18/05/2016

Leave a Reply