झूठ

झूठ हूँ मैं, जिसे वाक्छल या
असत्यता भी कहा जाता है।
मै ज्ञात मिथ्या जिसे सत्य के
रूप मे व्यक्त किया जाता है।।

निःसंकोच मेरा उपयोग करते
राजा हो या हो रंक फ़क़ीर।
तलवारों से ज्यादा बदली है
हमने सत्ताधारी की तकदीर।

मोहब्बत और जंग में सबसे
ज्यादा मै ही बोली जाती हूँ।
फिर भी निर्क्रिष्टता के तराजू
में मै हमेशा तौली जाती हूँ।।

विराट नगर में धर्मराज अगर
झूठ का सहारा नहीं लिए होते।
अज्ञातवास का भेद खुल जाता
किंचित सही परिचय दिए होते।।

जितनी कथा कहानी हैं सब
टिकी हैं मेरी ही बुनियाद पर।
अन्यथा कौन है यहाँ ब्रह्मज्ञानी
जो लिखे केवल यादास्त पर।।

बच्चे हो या बड़े बुजुर्ग सबके
जीवन में ऐसा पल आता है।
एक झूठ बोलने मात्र से वह
जलील होने से बच जाता है।।

सदा सच बोलों का पाठ हमें
बचपन से ही पढाया जाता है।
झटका लगता है जब एक सच
पर हमें डांट खिलाया जाता है।।

अगर मै वास्तव में बुरी हूँ तो
क्यों नहीं करते मेरा तिरस्कार
क्यों जीवन के किसी मोड़ पर
मुझे बनाते हो अचूक हथियार।।

सत्य असत्य अवस्था का दास
तत्क्षण उपयोगी अनुपयोगी ।
कब किसे कहाँ बोलना है
इसका चिन्तन समाजोपयोगी।।

सत्य की रक्षा में बोला गया
झूठ भी एक सत्य होता है।
झूठ खातिर कोई बोले हजारो
सत्य, असत्य से बदतर होता है

मै कहता हूँ मुझे प्रयोग करो
जब सारे रास्ते हो जाएँ बंद।
सच झूठ में किसे बोलना है
चुनों वही जो कहे अंतर्मन।।

(यह रचना झूठ के महिमा मंडन हेतु नहीं अपितु विचारार्थ है)
✍सुरेन्द्र नाथ सिंह “कुशक्षत्रप”✍

11 Comments

  1. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 17/05/2016
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 17/05/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 17/05/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 17/05/2016
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 17/05/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 17/05/2016
  4. babucm babucm 17/05/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 17/05/2016
  5. Kajalsoni 17/05/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 17/05/2016
  6. sarvajit singh sarvajit singh 17/05/2016

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