जिन खोजा तिन पाया…..

प्रेम का भूखा जग फिरे….
प्रेम न पायो कोये….
सारी धरती प्रेममय…
चक्षु खुलें तो चखना होये….
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/सी.एम. शर्मा (बब्बू)

8 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 17/05/2016
    • babucm babucm 17/05/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 17/05/2016
    • babucm babucm 17/05/2016
  3. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 17/05/2016
    • babucm babucm 17/05/2016
  4. Kajalsoni 17/05/2016
    • babucm babucm 18/05/2016

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