माँ

कैसे मैं इस दर्द में हूँ माँ,
जहाँ कैसे इस सर्द में हूँ माँ,
साथी नहीं ना संगी कोई,
दुआएं तेरी बस संग हैं अब माँ,
ख्वाब नहीं देखा सदियों में,
नींद नहीं अब आँखों में माँ,
सुला दे आकर तू मुझको,
लोरियाँ कुछ गाकर अब तू माँ,
भाती नहीं ये धूप है मुझको,
छांव तेरी आँचल की जैसे,
बुला रही अब मुझको है माँ,
कमी तेरी इस नए जहाँ में,
रूला रही अब मुझको है माँ,
कैसे करू ना याद तुझे मैं,
हर साँस हर रग मे मेरी,
नाम तेरा बस लिखा है माँ,
थक गया हूँ भाग-दौड़ कर,
एक बार फिर गले लगा कर,
प्यार तेरा बरसा दे ओ माँ,
खींच कर मुझको इस भीड़ से,
छिपा ले आँचल में तू माँ….

2 Comments

  1. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 17/05/2016
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 17/05/2016

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