मेरे आँगन में

मेरे आँगन में

चाँद की चाँदनी आज
उतरी है मेरे आँगन में
मन मेरा झूम उठा है
पाँव मेरे थिरकने लगे ।
कंपित रोएं-रोएं में
सितार जैसे बजने लगा
सातों सुर समेट लाई
पूर्व से आने वाली हवा
फू लों संग इठलाती गाती
आई है इस महीने में ।
मन मेरा झूम उठा है।
पाँव मेरे थिरकने लगे।
चुनरी आसमान सिर ओढ़े
सुन्दर प्यारे सितारे जडक़र
लेकर ठंडी सुघड़ शीतलता
और सुगन्ध अन्दर अपने भर
चंँचल अस्थिर बहकी सी
सुवाशित लगी साँसों को करने
मन मेरा झूम उठा है
पाँव मेरे थिरकने लगे ।

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  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 17/05/2016

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