झूठ कैसे भी बोलो

झूठ कैसे भी बोलो , किसी भी तरह से , झूठ कभी सच बनता नहीं है |
दीप कैसा भी हो , किसी भी तरह का , बिना तेल दीपक जलता नहीं है |
पोत कैसा भी हो , किसी भी तरह का , बिना दरिया पोत चलता नहीं है |
मौसम कैसा भी हो,किसी भी तरह का ,बिना सूर्य पंकज खिलता नहीं है |
आदेश कुमार पंकज

3 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 17/05/2016
  2. C.M. Sharma babucm 17/05/2016
  3. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 17/05/2016

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