गजल

गजल

बड़ी मुश्किलों से सहारा लगा था
डुब्नेवाला कश्ती किनारा लगा था

जाने किधर से आई बड़ी तूफान
जहाँ खड़ा कारवाँ बंजारा लगा था

फिर बर्षात ले आई बाढ़ उधर हीं
जिधर बनाने झोपड़ी बेचारा लगा था

चुग ले गई चिड़ियों ने सभी फसलें
सारी मेहनत जहाँ हमारा लगा था

वहीं रात फिर अमावस की आई
जहाँ पर इकट्ठा चाँद सितारा लगा था
१६-०५-२०१६

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