सरस्वती वंदना

हे वीणावादिनी जगदम्बे,चरणों में जगह दो ना………२
हे ज्ञान की मूरति माँ अम्बे ,अब देर लगाओ ना…….२
हे वीणावादिनी जगदम्बे…………..

१. हे सारे सुरों की साम्राज्ञी, कुछ सुर मुझको भी दे दो माँ….२
हे सरगम की विदुषी मैया,सरगम सिखला दो ना………
हे वीणावादिनी जगदम्बे………….

२. तू ज्ञान की सागर गायत्री, हम अज्ञानी जन हैं मेरी माँ……२
अधजल गगरी माँ ज्ञान की है,अब पूर्ति कर दो ना…..
हे वीणावादिनी जगदम्बे……………

३. क्या खता हुई मुझसे मैया, जो रूठ गयी तू माँ……..२
हे श्वेतवर्णी माँ हंसवाहिनी,शीध्रपधारो ना ……………..
हे वीणावादिनी जगदम्बे…………….

3 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 16/05/2016
  2. mani mani786inder 16/05/2016
  3. C.M. Sharma babucm 17/05/2016

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