” एक खत 7 “

प्रेमी –
जी चाहता है तुझसे तेरे गम चुरा लु ,
तेरे इन शबनमी होठो से शबनम चुरा लु ।
तुझे दुर जाते हुए कैसे देख पायेगी मेरी ये ऑखे,
काश ये ऑखे ही बंद हो जाये,
या इन ऑखो मे मै तुमको छुपा लु ।
ख्वाहिश गर हो तुम्हे भी मिलने की,
तो लिखना ,
इस जमाने से लड़ कर भी तुझे मै अपना बना लु ।।

प्रेमिका –
ख्वाहिशे दिल की हरदम पुरी नही होती,
सिर्फ जिस्मो के दुर जाने से मोहब्बत अधूरी नही होती,
मिल चुके है हम तुम,
जब मिले थे दो दिल ये हमारे ।
दुर रहकर भी साथ चलेंगे हमेशा,
जैसे चलते है नदी के ये दो किनारे ।।

काजल सोनी

8 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 17/05/2016
    • Kajalsoni 26/09/2016
  2. babucm babucm 17/05/2016
  3. Kajalsoni 17/05/2016
  4. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 17/05/2016
  5. Kajalsoni 17/05/2016
  6. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 17/05/2016
  7. Kajalsoni 17/05/2016

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