निकम्मे बच्चे

माँ अपने हाथो से खिला दे
स्नेह से थोड़ा जल भी पिला दे
ताकि बुद्धि मेरी बढ़ेगी
बिद्या मेरे मस्तिस्क चढ़ेगी

माँ ऐसा कर देती है
ममता का जल भर देती है
पालन पोषण के साथ मे
दुआ भी रोज वो कर देती है

बिद्यालय है कारावास नहीं
नियम से रहो ये आवास नहीं
सहपाठी और गुरु की इज्जजत
जर्रूरी है ये आस नहीं

घर से निकल कर छुप जायेंगे
वो कूरी की बूझ मे
बीड़ी का चस्का लगाकर
बुझाएंगे अपने सूज मे

यही कारण अवनति के उनका
ब्याख्या करू क्या गति के उनका
निकम्मे बच्चे कल की सोचते
जैसे अपने प्रगति के उनका

5 Comments

  1. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 16/05/2016
    • Mahendra singh Kiroula MK 16/05/2016
  2. Mahendra singh Kiroula Mahendra 16/05/2016
  3. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 16/05/2016
    • Mahendra singh Kiroula MK 17/05/2016

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