सपने है या पिंजरे के पंछी

सपने है या पिंजरे के पंछी
कुछ दिन आँखों मे रहते है,
फिर चुपके से उङ जाते है।

कुछ स्याह लकीरे मिट जाती है,
फिर नए अफसाने बनते है,
कुछ कोरे पन्ने जुङ जाते है।

अजब खेल है तेरा किस्मत,
कुछ कच्ची गांठे रह जाती है
और पक्के बखिये उधङ जाते है।

यह कौन राह है इश्क की जाने
कुछ दिन इस पर चलते है और
फिर जाने क्यूँ मुङ जाते है।

4 Comments

  1. Swati naithani swati 15/05/2016
    • kanukabir Kanukabir 02/06/2016
  2. C.M. Sharma babucm 16/05/2016
  3. kanukabir Kanukabir 02/06/2016

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