मशरूफ

हर कोई मशरूफ खुद की जिंदगानी में,
मिलजाए कोना हर किसी को,
सजा लिए पत्थरों के आशियाने,
पर किसी को किसी की खबर नहीं,
हर कोई मशरूफ खुद की जिंदगानी में,
ना माँ के कलेजे से लिपटना,
ना बाप के कंधो पर बैठ घूमना,
ना किसी को दिलचस्पी,
दादी-नानी की कहानी में,
हर कोई मशरूफ खुद की जिंदगानी में,
गुफ्तगू हर रोज नए चेहरों से,
पर वाकिफ नहीं खुद से,
जादुई कागजो की तलाश में,
सुबह कही, शाम कहीं,
हर कोई मशरूफ खुद की जिंदगानी में,
ना स्वेटर बुनती वो सिलाईया,
ना मुछो से लगी छाछ,
ना बरगद वाली ताश,
ढूंढो तो कहाँ ढूँढू,
हर कोई मशरूफ खुद की जिंदगानी में,
कागज़ की किश्ती, बारिश की मस्ती,
गुड्डे-गुड़ियों की शादी, मदारी का खेल,
अतेव मुमकिन कहाँ,
हर कोई मशरूफ खुद की जिंदगानी में,
खेतों में पसीना बहाना,
भरी दोपहर त्रिया का रोटी लाना,
पल्लू से पसीना सुखाना,
कभी जुदाई का अहसास,
सावन के पानी में,
हर कोई मशरूफ खुद की जिंदगानी में,
डरा हुआ, सहमा-सहमा सा,
हर कोई यहाँ,
मतलब के रिश्ते है जिन्दा,
वो भी सिर्फ जुबानी में,
हर कोई मशरूफ खुद की जिंदगानी में,

5 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 15/05/2016
    • mani mani786inder 15/05/2016
      • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 16/05/2016
        • mani mani786inder 17/05/2016
  2. babucm babucm 16/05/2016

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