विरासत

देखो किसी को किसी की खबर नहीं |
डूबे सभी खुद की जिंदगानी में ||
कैद हो बंद दीवारों में बैठे |
खोये हैं लोग अपनी कहानी में ||

ना माँ के कलेजे से ही लिपटना |
कौन सुने अब्बा की बात सयानी ||
गलियां सुनी पड़ी हैं जाने कब से |
बच्चें करते नहीं वहां शैतानी ||

जादुई कागज़ की तलाश सभी को |
कैसे देखो भूलें खाना पीना ||
बातें करें लोग जाने कितनों से |
औरों को सुन भूलें ख़ुद का जीना ||

ना स्वेटर बुने सिलाइया किसी की |
न दूध से मक्खन मथानी निकाले ||
बरगद की छाया में बैठे बुजुर्ग |
गांव की बातें आपस में सुना दे ||

कागज़ की किश्ती, बारिश की मस्ती |
वो मिट्टी के खिलौनों से खेलना |
तेल के दीप जलाना शाम होते ||
अंगीठी पर चपाती को सेंकना ||

हल चलाना वो भरी धुप खेतों में |
पत्नी का धुप में रोटी ले आना ||
पल्लू से पति का पसीना पोंछना |
प्याज़, छाछ से मिलकर रोटी खाना |

पहले हर घर कच्चा मन सच्चा था |
अब सबके मन झूठे हैं घर पक्के |
मतलब पर आज टिके सारे नाते |
पैसे आगे झूठे भी हैं सच्चे ||

“मनी” गुज़ारिश है तुझसे बस एक ही |
रिश्तों को मिलकर प्यार से निभा ले ||
अपनी विरासत को आज कैसे भी |
कोशिश कर बच्चों के लिये बचा ले ||

5 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 15/05/2016
    • mani mani786inder 15/05/2016
      • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 16/05/2016
        • mani mani786inder 17/05/2016
  2. C.M. Sharma babucm 16/05/2016

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