” एक खत 6 “

प्रेमी –
बड़ा याद आता है मुझे तुम्हारा वो मुस्कुराना ,
मेरी कुछ बचकानी बातो से ,
तुम्हारा रुठ जाना ।
समंदर जैसी गहरी ऑखे तुम्हारी ,
फिर यु मुंह फेर कर ,
तुम्हारा गलियो से गुजर जाना ।
तुम्हारी इन अदाओ का तो जमाना भी कायल है,
मुझ गरीब का झिझक झिझक कर ,
तुम्हे इस कदर मनाना ।
बेताबियो से बढती हुई मेरी सांसे ,
और कुछ ही पलो मे तुम्हारा वो लौट आना ।।

प्रेमिका –
जाने क्यु लिखा है तुमने अपने दिल की इन यादो को,
तुम्हे कोई गम न सताये,
क्या भुल गये मेरी उन फरियादो को ।
क्यु सताते हो खुद को मुझे यु याद करके ,
मांग लो उस खुदा से मुझे ,
तुम भी कुछ फरियाद करके ।
दिदार न हो तेरा जब तक,
मेरा भी जी नही भरता है ,
तुम इस सिद्ददत से मनाते हो मुझे,
बस बार -बार रुठ जाने को जी करता है ।
तुम्हारी ये बेताबिया,
मेरी भी बेताबियो को बढा जाती है ,
सच कहती हु ,
ऐ सनम मुझे भी तुम्हारी बहुत याद आती है । ।

काजल सोनी

8 Comments

  1. C.M. Sharma babucm 16/05/2016
  2. Kajalsoni 16/05/2016
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 16/05/2016
  4. Kajalsoni 16/05/2016
  5. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 16/05/2016
  6. Kajalsoni 16/05/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 16/05/2016
  7. Kajalsoni 16/05/2016

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