आइना सीरत का भेद नहीं बताता।

Mirror tells lies..

“न मुस्कुराइए यूँ इस तरह, आईने में चेहरा देखकर।आईना झूठ बोलता है।
इसमें सिर्फ सूरत नजर आती है।
ये सीरत का भेद नहीं खोलता है।
न गुमान कर अपनी सुन्दरता पर यूँ ही।
चार दिन की चांदनी है, फिर अँधेरी रात है।
उम्र के साथ साथ, घटता इसका रौब है।
सीरत तो जरा अच्छी कर के देख तू।
हर चेहरा एक आईना बन जायेगा।
हर शख्श की जुवां पर तेरा ही नाम आएगा।
खुदा भी तुझ पर अपने आशीष की महर बरसायेगा।
और अपने सुन्दर मन में तू सिर्फ, अपने भगवान की तस्वीर ही पायेगा।”

By:Dr Swati Gupta

3 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 15/05/2016
  2. babucm C.m. sharma (babu) 15/05/2016
  3. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 15/05/2016

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