” एक खत 5 “

प्रेमी –
जब -जब हमने उन्हे निहारा ,
वो नजरे चुरा रहे थे ,
सर्मो हया की कश्ती मे खुद को डुबा रहे थे ।
मासुम सी लगती थी उनकी मुस्कुराहट,
उनकी ये अदाये ,
रह रह दिल पर कहर सा ढा रहे थे ।
दिल भी धड़कता था बड़ी जोर से,
अब तो बस इन खतो का सहारा था ,
यु अपने अल्फाजो से हम उन्हे फरमा रहे थे ।
खामोश सी उनकी मोहब्बत को ,
अपनी बेचनियो से बढा रहे थे ।।

प्रेमिका –
सच लिखा है तुमने, अपने दिल के इन इरादो को,
काश तुम इन झुकी नजरो से जान पाते , मेरे भी जसबातो को ।
दुर सी लगती हु ,
पर बहुत करीब हु दिल के तुम्हारे ,
खुदा ने बड़ी सिद्ददत से पिरोया है चाहत को हमारे ।
शायद इन अल्फाजो की जरूरत ही नही थी,
यु ही जान जाती मै तुम्हारे दिल की हर बातो को । ।

काजल सोनी

6 Comments

  1. C.M. Sharma C.m. sharma (babu) 15/05/2016
  2. Kajalsoni 15/05/2016
  3. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 15/05/2016
  4. Kajalsoni 15/05/2016
  5. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 15/05/2016
  6. Kajalsoni 15/05/2016

Leave a Reply