” एक खत 4 “

प्रेमी –
शायद मेरे शब्द तुम्हे लुभा न सके,
मेरी ये दीवानगी, दीवाना तुम्हे बना न सके,
फुर्सत मिले तो जरुर पढना इन खतो को,
कही देर कर दी तुमने तो ऐसा न हो ,
तुम्हारे ही गम तुम्हे अपना न सके । ।

प्रेमिका –
तुम्हारी इस दीवानानगी ने खूब दीवाना बनाया मुझे ,
तुम्हारे खतो के तीरो ने खुब रुलाया मुझे,
अगर मै मर भी गयी तो अब गम न होगा,
तुम्हे दे कर जिदंगी ने,
बड़े अपनेपन से अपनाया मुझे । ।

काजल सोनी

14 Comments

  1. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 14/05/2016
    • Kajalsoni 26/09/2016
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 14/05/2016
  3. Kajalsoni 14/05/2016
  4. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 15/05/2016
  5. Kajalsoni 15/05/2016
  6. babucm C.M. Sharma (babbu) 15/05/2016
  7. Kajalsoni 15/05/2016
  8. babucm C.m.sharma (babbu) 15/05/2016
    • Kajalsoni 26/09/2016
  9. babucm C.m.sharma (babbu) 15/05/2016
    • Kajalsoni 26/09/2016
  10. Swati naithani swati 15/05/2016
  11. Kajalsoni 15/05/2016

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