सांस अाती है तेरा नाम लेकर

सांस अाती है तेरा नाम लेकर,
सांस जाती है तेरा नाम लेकर,

इक अजनबी शहर में आए है किसी की
तलाश में, गम गाँव के तमाम लेकर।

इसमें कहाँ वो नशा जो उसकी आखोँ में था,
दीवाना कहता है हाथों में जाम लेकर।

हश्र तो यही होना था, जानता था दिल
जब डूबे थे दरिया में, आखोँ में अंजाम लेकर।

जगमगाहट अब भी बाकी हैं मेरी आखोँ में
जाता हूँ में हर जगह तेरी यादों की शाम लेकर।

अंजान थे हम जो आ गए खाली जेब, कभी गुजरों
उन हसीनों की गली से तो, गुजरना दाम लेकर।

5 Comments

  1. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 14/05/2016
  2. munshi prenchand uday 14/05/2016
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 14/05/2016
  4. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 14/05/2016
  5. kanukabir Kanukabir 15/05/2016

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