अक्सर

दुनियादारी कर्म-कांडो को,
अभिमान भरे लम्हों को,
ईष्या भरी मुस्कान को,
क्रोध भरे जीवन को,
शक भरे प्यार को,
वक्त से पहले हार को,
जरूरत से ज्यादा पैसे वाले को,
औलाद बिना माँ-बाप को,
अक्सर टूटते देखा है मैंने |

3 Comments

  1. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 13/05/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 14/05/2016
  3. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 14/05/2016

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