नई पहल

कैसी ये उलझन
सुलझाए न सुलझे,
जो मेरा मन रोए,
सो तेरा मन रोए।

कहते दृग बुझते
क्या बोया,
क्या काटा,
टूटा जो धागा
क्या खोया,
क्या पाया।।

जब-
तेरा -मेरा प्रेम है साझा
है पीड़ा साझी,
धड़कन है साझी
हर साँस है साझी,
फिर बोल प्रिये,
क्यों तू है आधा,
क्यों मैं हूँ आधी।

न तू है सूरज,
न मैं हूँ चंदा,
न भ्रम का फैला
है कोई फंदा,
हम दोनों तो हैं
आजाद परिंदा ।।
तो चल-
ज्यों बहता सलिल
त्यों उड़ते हैं हम,
बह चलते हैं
नए दर्ख के संग।

अलका

10 Comments

  1. Jay Kumar 13/05/2016
    • ALKA प्रियंका 'अलका' 14/05/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 13/05/2016
    • ALKA प्रियंका 'अलका' 14/05/2016
  3. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 14/05/2016
    • ALKA प्रियंका 'अलका' 14/05/2016
  4. Meena Bhardwaj Meena bhardwaj 14/05/2016
    • ALKA प्रियंका 'अलका' 14/05/2016
  5. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 14/05/2016
    • ALKA प्रियंका 'अलका' 14/05/2016

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