कल की बात

जाने जैसे कल की बात हो,
बचपन के वो बेफिक्र दिन,
नटखट कभी, मासूम कभी,
कहीं माँ की गोद,
कहीं बाप की ऊँगली,
दोस्तों के संग गुल्ली डंडा,
कभी क्रिकेट की गुगली,
जाने जैसे कल की बात हो,
जवानी के वो जोशीले पलछिन,
था कुछ कर गुजरने का जनून,
मुकाम को पाना का ख्वाब,
कभी काम का था बोझ,
कभी प्यार से मिलने की थी जल्दी,
जाने जैसे कल की बात हो,
बच्चों को अच्छी शिक्षा,
सही-गलत समझाने की,
जिंदगी के अनुभव को,
सिखलाने की इच्छा,
जाने जैसे कल की बात हो,
ना वक्त मेरा, ना किसी और का होगा,
रेत की तरह फिसल जायेगा,
जिंदगी जी लो जी भर के,
वर्ना सोचोगे,
जाने जैसे कल की बात हो,

2 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 13/05/2016
  2. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 13/05/2016

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