“एक खत 3 “

प्रेमी –
तन्हाईयो के आगोश मे हमे
तुम अपना बना कर चले गये ,
तुम्हारा रुख इन हवाओ कि तरह था,
न जाने कितने जसबात , बहा कर चले गए,
हम तुम्हे खत लिख लिख कर पुछते रहे,
कि क्या राज था वो ,जो दिल मे छुपा कर चले गये ।
दुर ही जाना था, तो पास क्यु आये,
जिदंगी मे इक अगन मोहब्बत की लगा कर चले गये ।।

प्रेमिका –
मै कोई हवा नही जो रुक जाऊ,
मै कोई वक़्त नही जो थम जाऊ,
अजीब कशमोकश मे है मेरी जिंदगी
गर न पा सकी तुम्हे तो शायद टुट कर बिखर जाऊ ।
तुम तो जसबात ए बया खतो से करके चले गए,
हम तुम्हारी यादो मे जलते रहे,
वफाओ के आलम मे,
और तुम हमे बेवफा बता कर चले गये ।।

काजल सोनी

8 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 14/05/2016
    • Kajalsoni 26/09/2016
  2. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 14/05/2016
  3. Kajalsoni 14/05/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 14/05/2016
  4. Kajalsoni 14/05/2016
  5. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 14/05/2016
    • Kajalsoni 26/09/2016

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