मुस्काती हवा

मुस्काती हवा

फूलों को कर डाल से जुदा
खुब मुस्कुराती है हवा।
मगर उसे ये पता नही
वह भी हुई किन-किन से जुदा।
इतनी चंचल इतनी सुखमय
तु बनी है स्वभाव से
तेरा ऐसा स्वभाव ही
है तेरे विषय में बता रहा ।
फू लों को कर डाल से जुदा
खुब मुस्कुराती है हवा।
तूने खाई हैं लाख ठोक रें
फि र भी नही रूकती है तु
पहाड़ आए या आए चट्टान
काम है तेरा बस बहना।
फू लों को कर डाल से जुदा
खुब मुस्कुराती है हवा।
तेरा स्वभाव ऐसा होने पर
नही समझती दूसरे का दुख
सुख यदि तुम्हें नही तो
क्यों छिनती हो दूसरे की खुशियाँ
फू लों को कर डाल से जुदा
खुब मुस्कुराती है हवा।

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