फिर लौटे बचपन

फिर लौटे बचपन

काश फि र लौट आए बचपन
बचपन की हठखेलियां
झोली भर लाती खुशियां
माँ देती आँचल की छाँव
खिलाती बनाकर वो गुजिया
आज हमें काम की चिन्ता
करती रहती तंग हरदम ।
काश फि र लौट आए बचपन।
न था कोई डर हमें
न थी किसी काम की चिन्ता
खाते मनपसंद भोजन हम
रूठ जाते जो कभी न मिलता
जोड़ हाथ फि र मनाती माँ
खा लो बेटा तुम भोजन ।
काश फि र लौट आए बचपन।

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  1. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 13/05/2016

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