” एक खत 2 “

प्रेमी –
शायद इंतजारो के इम्तिहान मे बैठे है ,
हम उनके दिदार को अरमा मे जगा कर बैठे है ,
पैगाम भेजा था हमने उन्हे,
कि शोला दिल मे जगा के बैठे है ,
उन्हे तो फुर्सत ही नही शायद,
और हम किसी बेदर्द को दिल मे पनाह दिये बैठे है ।।

प्रेमिका –
कितना आसान होता है मोहब्बत मे दिल को जलाना,
है उतनी ही मुश्किले , इक दुजे को समझ पाना,
काश तुम्हे मै ये समझा पाती ,
कि हम भी तुम्हारे दिदार की समा जला कर बैठे है,
अपने महबूब से मिलने की ख्वाहिश किसे नही होती,
बहते हुए अश्क हम आखो मे छुपा कर बैठे है ।
मचलते हुए दिल ,
उठती हुई हर कशिश को मजबूरीयो मे दबा कर बैठे है ।।

काजल सोनी

10 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 13/05/2016
    • Kajalsoni 26/09/2016
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 13/05/2016
  3. Kajalsoni 13/05/2016
  4. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 13/05/2016
    • Kajalsoni 26/09/2016
  5. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 13/05/2016
  6. Kajalsoni 13/05/2016
  7. Aarav 14/05/2016
  8. Kajalsoni 14/05/2016

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