डिग्री डिबेट

देश के ताजा महौल पर मेरी पंक्तियाँ —

घोटालो के घाव हद से भी आर-पार हुए
फ़िर भी दलालों के ना पीर हुई पेट में
और आस्था के अर्थ पे तो हो रहा कुतर्क
अटका है न्याय भ्रष्ट अदालत के डेट में
धूल फांक रहे हैं नहर नाले जलाशय
और कसाई लगे माँ धेनु की आखेट में
केरल की निर्भया भी ना दिखती किसीको
ख़बरंडियां लगीं हैं डिग्री-डिबेट में

कवि देवेन्द्र प्रताप सिंह “आग”
9675426080
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6 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 13/05/2016
  2. mani mani786inder 13/05/2016
  3. कवि देवेन्द्र प्रताप सिंह "आग" कवि देवेन्द्र प्रताप सिंह "आग" 13/05/2016
  4. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 13/05/2016
  5. कवि देवेन्द्र प्रताप सिंह "आग" कवि देवेन्द्र प्रताप सिंह "आग" 14/05/2016
  6. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 14/05/2016

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