गुलमोहर

गुलमोहर

गुलमोहर तुम्हारे सुर्ख ,सुनहरे ,
सुंदर, सजीले ,अशर्फी से फूल !!
इन्हे देख भीषण गर्मी में ,
राह की थकन , गए राही भूल !
छतनार से पत्ते छितराए,
जेठ की दुपहरिया में खड़े हो इतराए !
ग्रीष्म जब दिखलाता तेवर ,
तुम बन जाते धरा के जेवर !
ज्यों ज्यों गर्मी का पारा चढ़ता ,
त्यों त्यों फूलों से वृक्ष लदता !
सहनशील ,बहादुर से बांके ,
समूची सृष्टि तुम्हें ही ताके !
पानी भरने जाती ललनाएँ ,
शीतल छाँह में नयी जान सी पाएँ !
गुलमोहर तुम्हारे सुर्ख ,सुनहरे ,
सुंदर ,सजीले ,अशर्फी से फूल !!

दीपिका शर्मा

5 Comments

  1. mani mani786inder 12/05/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 12/05/2016
  3. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 12/05/2016
  4. babucm babucm 13/05/2016
  5. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 14/05/2016

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