==* हस पगले तू *==

हस पगले तू हँसले थोडा
सारी उमर है तुझको रोना
ये जीवन का कड़वा सच है
क्या पाना था क्या है खोना

जो सोचेगा होगा कभी ना
जीवन सपनो सा है खिलौना
मानले तू यही है सच्चाई
थोडा हसना और थोडा रोना

रोकर अपने दिल ही दिल में
राज वो कड़वे सारे दबाना
भूलकर अब ये जीवन तेरा
हसते हुये दिन रात बिताना

जीवन क्या है एक छलावा
भावनाओंके खेल है सारे
किस्मत का हात पकड़ चल
टुटता है जब सपने तेरे

रोना धोना मरते दम तक
तुझको है औरो को हसाना
अपने लिए तो हर कोई जीता
औरो के लिए है तुझको जीना
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✍शशिकांत शांडिले, नागपूर
भ्र. ९९७५९९५४५०
Has Pagle Tu

3 Comments

  1. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 12/05/2016
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 12/05/2016
  3. शशिकांत शांडिले SD 21/06/2016

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